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'घर पास आ गया' तो खींच दी अलार्म चेन, एक महीने में दबोचे 58 'चेन पुलर्स'

रेलवे अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस बकवास व्यवहार का सीधा नुकसान भारतीय रेल के परिचालन को होता है

21 Jun 2026

'घर पास आ गया' तो खींच दी अलार्म चेन, एक महीने में दबोचे 58 'चेन पुलर्स'

कोलकाता। भारतीय रेल को देश की लाइफलाइन कहा जाता है, लेकिन कुछ गैर-जिम्मेदार यात्री इसे अपनी निजी जागीर या ऑटो समझने की भूल कर बैठते हैं। पूर्व रेलवे ने यात्रियों की घोर लापरवाही और मनमाने रवैये को उजागर करने वाली एक बेहद चौंकाने वाली और हैरान करने वाली रिपोर्ट जारी की है। इस आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, मई महीने के महज 31 दिनों के भीतर पूर्व रेलवे के चार प्रमुख रेल मंडलों में कुल 86 बार बिना किसी वास्तविक आपात स्थिति के ट्रेनों की अलार्म चेन (एसीपी) खींची गई। यात्रियों की इस ओछी हरकत की वजह से न केवल कई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों का चक्का बीच रास्ते में ही जाम हो गया, बल्कि पूरी रेल समय-सारिणी पूरी तरह चरमरा गई और हजारों सह-यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अब तक 72 केस दर्ज किए हैं और कुल 58 आरोपियों को सलाखों के पीछे धकेल दिया है।
रेलवे प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह अनियंत्रित चेन पुलिंग हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा मंडलों में 1 मई से 31 मई के बीच धड़ल्ले से की गई, जिसमें सबसे खराब स्थिति आसनसोल और हावड़ा मंडल की रही। जब आरपीएफ ने पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की, तो ट्रेन रोकने की जो वजहें सामने आईं, उन्होंने अधिकारियों का भी सिर चक्रा दिया। आसनसोल और मालदा मंडल में चार-चार शातिर यात्रियों ने सिर्फ इसलिए चलती ट्रेन को वैक्यूम कर दिया क्योंकि ट्रेन उनके घर के ठीक पीछे से गुजर रही थी और वे निर्धारित स्टेशन तक जाने का किराया और समय बचाने के लिए वहीं पटरी पर उतरना चाहते थे। वहीं, आसनसोल में तीन और हावड़ा में दो ऐसे आलसी यात्री पकड़े गए जो चलती ट्रेन में गहरी नींद सो गए थे और जब आंख खुली तो उनका गंतव्य स्टेशन काफी पीछे छूट चुका था, जिससे घबराकर उन्होंने तुरंत आपातकालीन चेन खींच दी। कुछ यात्रियों ने तो हद ही पार कर दी; आसनसोल के आठ और सियालदह के दो यात्रियों ने पकड़े जाने पर बड़ी मासूमियत से यह अजीबोगरीब बहाना बनाया कि उनसे गलती से चेन खींच गई थी।
इतना ही नहीं, लापरवाही का आलम यह था कि आसनसोल मंडल में दो यात्रियों को बाकायदा अलार्म चेन के लीवर में ही अपना भारी-भरकम ट्रैवल बैग लटकाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया, जिससे वजन के कारण चेन खुद-ब-खुद सक्रिय हो गई और ट्रेन अचानक झटके के साथ रुक गई। कुछ अन्य मामलों में लोग अपने सगे-संबंधियों को ट्रेन के भीतर तक विदा करने चढ़े थे और जब ट्रेन चल पड़ी तो उतरने के चक्कर में उन्होंने गाड़ी रुकवा दी। सियालदह में एक यात्री का मोबाइल फोन खिड़की से नीचे गिर गया था, तो उसने पूरी ट्रेन खड़ी कर दी, जबकि हावड़ा में एक भुलक्कड़ यात्री प्लेटफॉर्म पर अपना कीमती सामान भूलकर ट्रेन में बैठ गया था और याद आने पर उसने चेन खींच दी।
रेलवे अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस बकवास व्यवहार का सीधा नुकसान भारतीय रेल के परिचालन को होता है। आंकड़ों के मुताबिक, एक बार बिना वजह अलार्म चेन खींचे जाने के कारण आसनसोल मंडल में औसतन 13 मिनट, हावड़ा में 14 मिनट और मालदा व सियालदह मंडलों में अधिकतम 17 मिनट तक ट्रेनें लेट हुईं, जिससे पीछे आ रही अन्य वीआईपी ट्रेनों को भी आउटर पर खड़ा होना पड़ा। रेलवे ने कड़ा ऐक्शन लेते हुए आसनसोल से 33, हावड़ा से 13, मालदा से 8 और सियालदह से 4 सिरफिरे यात्रियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। पूर्व रेलवे प्रशासन ने सख्त लहजे में यात्रियों से अपील की है कि अलार्म चेन का उपयोग केवल जान-माल के खतरे जैसी वास्तविक आपात स्थिति में ही करें। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की नई व्यवस्था के तहत रेलवे ने साफ कर दिया है कि किसी की निजी भूल या सुविधा के लिए ट्रेन रोकना एक गंभीर दंडनीय अपराध है और भविष्य में ऐसे तत्वों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत और ज्यादा कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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